वोल्तेयर: सहिष्णुता में असहमति की जगह कहाँ है?
किसी विश्वास को गलत समझना और उसके मानने वाले को दंडित करना अलग बातें हैं। वोल्तेयर का सहिष्णुता पर आग्रह इसी अंतर को सार्वजनिक महत्व देता है। प्रश्न यह है कि मनुष्यों से गलती होने की संभावना के बीच साथ कैसे रहें।

निश्चितता से उत्पीड़न तक
ट्रीटाइज़ ऑन टॉलरेंस धार्मिक असहिष्णुता और ज्याँ कालास के मामले की पृष्ठभूमि में लिखा गया। सीमित मानव ज्ञान को अंतिम सत्य की निश्चितता समझ लेना हिंसा को उचित ठहराने का रास्ता बना सकता है।
सहिष्णुता सभी विचारों को समान रूप से सही कहना नहीं है। तर्क, आलोचना और जाँच जारी रह सकती है। नागरिक जीवन में दूसरों की स्वतंत्रता सुरक्षित रखने के लिए धार्मिक सहमति की अनिवार्यता पर प्रश्न उठता है।
स्थानीय विवाद का काल्पनिक दृश्य
काल्पनिक नगर में दो समूह एक-दूसरे के धार्मिक निष्कर्ष अस्वीकार करते हैं। साझा नियम तय करते समय उन्हें पहले एक धर्म स्वीकारने को कहना समझौते को असंभव बना सकता है। सहअस्तित्व का प्रश्न सत्य पर मतभेद के रहते भी उठता है।
लेखक की अपनी सीमाएँ
वोल्तेयर को आधुनिक समानता का निर्विवाद प्रतिनिधि बनाना गलत होगा। उनके लेखन में पूर्वाग्रह और विरोधाभास भी हैं। सहिष्णुता के तर्क की ताकत जाँचते समय यह पूछना जरूरी है कि वह किन लोगों पर लागू हुआ और किन पर संकुचित रहा।
क्या सहिष्णुता का अर्थ आलोचना बंद करना है?
नहीं। विश्वास की आलोचना और व्यक्ति का उत्पीड़न अलग क्रियाएँ हैं।
क्या सभी मत सच हो जाते हैं?
नहीं। यह मुख्यतः असहमति के बीच नागरिक संबंध और दंड की सीमा का प्रश्न है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
वोल्तेयर (Voltaire) — तर्क, सहिष्णुता और नागरिक साहस। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 101। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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