सार्त्र: अस्तित्व सार से पहले का अर्थ क्या है?
किसी से कहा गया कि वह जन्म से ही ऐसा है, इसलिए बदलने का प्रश्न नहीं। सार्त्र का अस्तित्ववाद तैयार परिभाषा में मनुष्य को बंद करने का विरोध करता है। अस्तित्व सार से पहले का अर्थ है कि मनुष्य पहले संसार में होता है और अपने कार्यों से जीवन की पहचान बनाता है।

वस्तु और मनुष्य का फर्क
व्याख्यान में बनी हुई वस्तु का उद्देश्य निर्माता पहले तय करता है। सार्त्र अपने नास्तिक अस्तित्ववाद में मनुष्य के लिए ऐसा पूर्वनिर्धारित दिव्य खाका नहीं मानते। इसलिए पहचान केवल पहले से मिली सूची नहीं; परियोजनाओं और कार्रवाई का प्रश्न है।
स्वतंत्रता का भार
यह कोई भी मनचाही चीज पा सकने की गारंटी नहीं। चुनाव परिस्थिति में होता है, और परिणाम दूसरों से जुड़ते हैं। अपनी कार्रवाई को केवल भूमिका या बहाने के पीछे छिपा देना जिम्मेदारी से बचने का रूप बन सकता है।
एक काल्पनिक दफ्तर
काल्पनिक कर्मचारी रमन कहता है कि वह केवल निर्देश मान रहा था, इसलिए गलत विवरण देने में उसकी कोई भूमिका नहीं। संपादकीय प्रश्न होगा कि उसके उपलब्ध विकल्प क्या थे और उसने किसे चुना। यह दूसरों के दबाव को नगण्य मानने का दावा नहीं; परिस्थिति का ठोस विश्लेषण चाहिए।
सीमा महत्वपूर्ण है: चुनाव पर अधिक जोर गरीबी, हिंसा और संस्थागत बंधनों को छोटा दिखा सकता है। सार्त्र की व्यापक कृतियों और आलोचकों के साथ यह प्रश्न पढ़ना जरूरी है। यह आरंभिक परिचय उनकी कठिन आत्मचेतना और शून्यता की पूरी प्रणाली का विकल्प नहीं।
क्या सार्त्र कहते हैं कि शरीर और समाज का कोई असर नहीं?
नहीं। स्वतंत्रता और परिस्थिति का संबंध कठिन है; विचार को असीम विकल्प के नारे में बदलना गलत होगा।
क्या केवल खुद को नया नाम देने से पहचान बदलती है?
उनके यहाँ कार्रवाई और परियोजना महत्वपूर्ण हैं। शब्द से अधिक जीने का ढंग परीक्षा में आता है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
जाँ-पॉल सार्त्र (Jean-Paul Sartre) — स्वतंत्रता, शून्यता और उत्तरदायित्व। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 70। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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