रसेल: दिखने वाली मेज से हम क्या जानते हैं?
एक ही मेज अलग रोशनी में अलग रंग की दिखती है। पास और दूर से उसका आकार भी बदलता दिखाई देता है। बर्ट्रैंड रसेल इसी साधारण अनुभव से रूप और वास्तविकता का दार्शनिक अंतर खोलते हैं।

अनुभव और उसका अनुमान
द प्रॉब्लम्स ऑफ फिलॉसफी में प्रश्न है कि सीधे अनुभव की गई चीज और बाहरी भौतिक वस्तु का संबंध कैसे समझें। हम मेज को स्थिर मानते हैं, जबकि उसके दिखने का ढंग देखने की स्थिति पर निर्भर है।
इससे तुरंत यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि मेज है ही नहीं। बल्कि साधारण विश्वास के आधार पूछे जाते हैं। दर्शन यहाँ परिचित उत्तर को नष्ट करने से पहले उसकी मान्यताओं को स्पष्ट और तर्क की जाँच के योग्य बनाता है।
फोटो का काल्पनिक उदाहरण
दो विद्यार्थी अलग प्रकाश में उसी कप की तस्वीर लेते हैं और रंग पर झगड़ते हैं। किसी एक छवि को अंतिम वास्तविकता मानने से पहले रोशनी, कैमरा और देखने की स्थिति पूछनी होगी। उदाहरण रसेल का ऐतिहासिक प्रसंग नहीं है।
एक आरंभिक पुस्तक की सीमा
रसेल का आरंभिक ज्ञान-विचार उनके पूरे जीवन के दर्शन का स्थायी सार नहीं है। इंद्रिय-प्रदत्तों पर उनके तर्क बहस का विषय हैं। आज का प्रत्यक्षण-विज्ञान अनुभव का अध्ययन अलग विधियों से भी करता है।
क्या दर्शन हर चीज पर संदेह करना है?
यहाँ उद्देश्य विश्वासों के आधार समझना है, संदेह को अंतिम नारा बनाना नहीं।
क्या दिखाई देना महत्वहीन है?
नहीं। वही जाँच का आरंभ है; उससे निकला निष्कर्ष अतिरिक्त तर्क माँग सकता है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
बर्ट्रैंड रसेल (Bertrand Russell) — तर्क, ज्ञान और स्वतंत्र विचार। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 84। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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