रिक्योर: बदलते जीवन में अपनी पहचान कैसे समझें?
हम कई वर्षों में बदलते हैं, फिर भी कहते हैं कि वादा मैंने किया था। पॉल रिक्योर पहचान की इस कठिनाई को केवल स्थायी गुणों की सूची से नहीं समझते। कथा और जिम्मेदारी के बीच संबंध महत्वपूर्ण बनता है।

एक जैसा और वही व्यक्ति
वनसेल्फ ऐज़ अनदर में समानता वाली पहचान और स्वयं बने रहने के प्रश्न अलग किए जाते हैं। चरित्र के लक्षण बदल सकते हैं। फिर भी वचन निभाने में व्यक्ति भविष्य के दूसरे के प्रति अपने को उत्तरदायी रखता है।
कथात्मक पहचान जीवन की घटनाओं को संबंध में रखती है। हम केवल अलग क्षणों का ढेर नहीं देखते; क्रिया, संयोग और दूसरे लोगों की भूमिका से जीवन को समझते हैं। यह कथा हमेशा पूरी तरह हमारे नियंत्रण में नहीं होती।
वादा निभाने का काल्पनिक दृश्य
काल्पनिक व्यक्ति नया काम मिलने के बाद पुराने सहयोगी की मदद का वादा भूलना चाहता है। अपनी पसंद बदलना तथ्य है, लेकिन उससे जिम्मेदारी अपने आप समाप्त नहीं होती। कथा में बदलाव और नैतिक निरंतरता का तनाव दिखाई देता है।
सुंदर कहानी की सीमा
जीवन की सुसंगत कहानी बनाना दूसरों के अनुभव या असुविधाजनक तथ्य मिटा भी सकता है। कथात्मक पहचान हर समस्या को कहानी से हल करने की तकनीक नहीं है। आलोचना, प्रमाण और दूसरों की गवाही हमारी आत्मकथा को संशोधित कर सकती हैं।
क्या पहचान हमेशा अपरिवर्तनीय गुण है?
रिक्योर गुणों की समानता और उत्तरदायी स्वयं बने रहने में अंतर करते हैं।
क्या अपनी कहानी अकेले लिखते हैं?
नहीं। दूसरे लोग, सामाजिक संबंध और अनचुनी घटनाएँ उसमें हिस्सा लेते हैं।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
पॉल रिक्योर (Paul Ricoeur) — व्याख्या, कथा और नैतिक पहचान। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 110। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
स्रोत और आगे की पढ़ाई










टिप्पणियां