पॉपर: खंडनीय दावा वैज्ञानिक क्यों माना जाता है?
ऐसा दावा जो हर संभव परिणाम के बाद सही घोषित हो जाए, अनुभव से क्या सीख सकता है? कार्ल पॉपर की खंडनीयता का प्रश्न यही है। वैज्ञानिक सिद्धांत को ऐसी स्थितियाँ बतानी चाहिए जिनमें वह गलत निकल सकता है।

जोखिम लेने वाली भविष्यवाणी
द लॉजिक ऑफ साइंटिफिक डिस्कवरी में विज्ञान की पहचान अंतिम निश्चितता से नहीं होती। अनेक अनुकूल उदाहरण किसी सार्वभौमिक कथन को हमेशा के लिए सिद्ध नहीं कर देते। कठोर परीक्षा में असफल होने की संभावना उसका ज्ञानगत महत्व है।
किसी सिद्धांत का अभी खंडित न होना और उसका अचूक होना अलग हैं। बेहतर सिद्धांत अधिक समझा सकता है और कठिन परीक्षण सह सकता है, फिर भी भविष्य में संशोधन के लिए खुला रहता है।
दावे की काल्पनिक परीक्षा
कोई कहे कि उसका तरीका हर पौधे को सात दिनों में बढ़ाता है। पहले बढ़ने का माप, पौधों की स्थिति और तुलना तय करनी होगी। हर असफलता पर अदृश्य बाधा जोड़ देना दावे को जाँच से बचाता है।
एक प्रयोग का मतलब
वास्तविक विज्ञान में उपकरण, सहायक धारणाएँ और आँकड़ों की गुणवत्ता भी जाँची जाती हैं। इसलिए किसी एक विचित्र परिणाम पर पूरा सिद्धांत तुरंत फेंक देना पॉपर की समस्या का पर्याप्त उत्तर नहीं। खंडनीयता अर्थहीन और सार्थक का सार्वभौमिक विभाजन भी नहीं है।
क्या खंडनीय का अर्थ पहले से गलत है?
नहीं। उसका अर्थ है कि गलत सिद्ध करने वाली संभावित परीक्षा बताई जा सकती है।
क्या गैरवैज्ञानिक कथन व्यर्थ होता है?
नहीं। नैतिक और दार्शनिक प्रश्न दूसरी तरह के औचित्य माँग सकते हैं।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
कार्ल पॉपर (Karl Popper) — खंडनीयता, आलोचना और खुला समाज। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 85। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
स्रोत और आगे की पढ़ाई










टिप्पणियां