प्लोटिनस का परम एक: अनेकता का आधार क्या है?
यदि संसार में इतने अलग रूप हैं, तो उनकी एकता किस पर टिकती है? प्लोटिनस का परम एक अनेक वस्तुओं में से सबसे बड़ी वस्तु नहीं। वह समस्त अस्तित्व का ऐसा आधार है जिसे सामान्य विभाजन और गुणों में पूरी तरह बाँधना कठिन है।

एक से बुद्धि तक
प्लोटिनस परम एक के बाद बुद्धि या Nous की चर्चा करते हैं। बुद्धि में ज्ञाता और ज्ञेय तथा विचार के रूपों की बहुलता आती है। इसलिए परम एक को केवल अत्यंत शक्तिशाली बुद्धि मान देना उनके स्तरों का फर्क मिटा देगा।
उद्भव का अर्थ
प्रकाश के स्रोत जैसी उपमाएँ बताती हैं कि आधार अपने उत्पाद से घट नहीं जाता। बुद्धि से आत्मा के स्तर का विवेचन भी आता है। इस क्रम को किसी समय पर हुए भौतिक विस्फोट की तरह नहीं पढ़ना चाहिए; दार्शनिक निर्भरता और प्राकृतिक घटनाक्रम अलग हैं।
लौटना कहाँ है?
आत्मा की वापसी का अर्थ नक्शे पर किसी दूर स्थान जाना भर नहीं। बिखरी हुई आसक्तियों से अपने बौद्धिक और आध्यात्मिक आधार की ओर ध्यान करना इसका एक पक्ष है। एक काल्पनिक पाठक कई भूमिकाओं में उलझकर जीवन के एकीकृत उद्देश्य पूछता है। यह केवल संपादकीय उपमा है; प्लोटिनस की एकता का अनुभव सिद्ध नहीं करती।
सीमा जरूरी है: इन स्तरों का अस्तित्व आधुनिक विज्ञान का स्थापित परिणाम नहीं। प्रकाश की सुंदर उपमा तत्त्वमीमांसा का प्रमाण अपने आप नहीं बनती। शरीर से ऊपर उठने की भाषा को शरीर या दूसरों की जरूरत की उपेक्षा का लाइसेंस भी नहीं मानना चाहिए।
क्या परम एक का मतलब गिनती का पहला अंक है?
नहीं। वह अस्तित्व के आधार की चर्चा है; संख्याओं की श्रृंखला में एक अतिरिक्त सदस्य नहीं।
क्या उद्भव एक ऐतिहासिक निर्माण-घटना है?
इस पढ़त में मुख्य प्रश्न निर्भरता और स्तरों का है। समय में सामान्य कारीगरी जैसी घटना मानना भ्रामक होगा।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
प्लोटिनस (Plotinus) — परम एक, बुद्धि और आत्मा की वापसी। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 61। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
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