जॉन स्टुअर्ट मिल: असहमति और हानि में क्या फर्क है?
पड़ोसी का पहनावा हमें पसंद नहीं। क्या इससे उसे रोकने का अधिकार मिल जाता है? मिल व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर समाज के हस्तक्षेप के लिए केवल नापसंदगी से मजबूत आधार चाहते हैं। उनका हानि-सिद्धांत दूसरों को होने वाली क्षति और किसी की अलग पसंद से होने वाली नाराजगी का फर्क पूछता है।

भले के नाम पर दबाव
On Liberty में केवल व्यक्ति का अपना हित उसे जबरन नियंत्रित करने का पर्याप्त आधार नहीं माना गया। समाज सलाह दे सकता है, समझा सकता है और आलोचना कर सकता है; बलपूर्वक रोकने का औचित्य अलग प्रश्न है। उनका तर्क परिपक्व व्यक्तियों की स्वतंत्रता पर केंद्रित है।
जीवन के प्रयोग
विविध जीवन-पद्धतियाँ मानव विकास में योगदान दे सकती हैं। सबको बहुमत के ढाँचे में ढालना उन संभावनाओं को घटाता है। इसलिए स्वतंत्रता केवल राज्य से सुरक्षा नहीं; सामाजिक अनुरूपता के दबाव पर भी प्रश्न है।
एक काल्पनिक विवाद
एक पुस्तक मंडली में नई कविता अप्रिय लगती है। उसे न पढ़ना और आलोचना लिखना एक बात है; लेखक को धमकाकर चुप करना दूसरी। यह संपादकीय उदाहरण है। यदि बात धमकी या वास्तविक नुकसान तक जाए, तो उसका आकलन अलग करना होगा।
सीमा यहीं कठिन होती है: हानि क्या है, वह कितनी प्रत्यक्ष है और असमान शक्ति उसे कैसे बदलती है? मिल का सूत्र स्वतः हर विवाद सुलझा नहीं देता। उनके ऐतिहासिक अपवादों और औपनिवेशिक दृष्टिकोण की आलोचना भी जरूरी है।
क्या स्वतंत्रता का मतलब किसी की आलोचना न हो?
नहीं। असहमति और तर्कपूर्ण आलोचना स्वतंत्र चर्चा का हिस्सा हैं। धमकी या अनुचित दमन अलग प्रश्न हैं।
क्या केवल नाराजगी ही हानि है?
मिल का भेद इसी सरल समानता को चुनौती देता है। फिर भी वास्तविक मामलों में नुकसान की प्रकृति ध्यान से जाँचना पड़ता है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
जॉन स्टुअर्ट मिल (John Stuart Mill) — स्वतंत्रता, उपयोगिता और समानता। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 37। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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