जॉन लॉक: अनुभव से विचार कैसे बनते हैं?
बच्चा पहली बार आम चखता है। उसे मिठास का विचार कहाँ से मिला? लॉक विचारों की सामग्री को अनुभव से जोड़ते हैं। लेकिन अनुभव का अर्थ उनके यहाँ केवल बाहर की वस्तु देखना नहीं; अपने मन की गतिविधियों पर ध्यान देना भी इसका दूसरा स्रोत है।

संवेदन का रास्ता
बाहरी चीजें इंद्रियों के माध्यम से रंग, ध्वनि, कठोरता और स्वाद जैसे विचार देती हैं। लॉक जन्मजात तैयार विचारों की धारणा पर प्रश्न करते हैं। खाली कागज की प्रसिद्ध उपमा इसी सामग्री के उद्गम के संदर्भ में पढ़नी चाहिए।
चिंतन क्या देखता है?
सोचना, संदेह करना, विश्वास करना और इच्छा करना मन की गतिविधियाँ हैं। उन्हें देखने से reflection के विचार मिलते हैं। इसलिए लॉक का मन केवल निष्क्रिय कैमरा नहीं। सरल सामग्री से जटिल विचार बनाने, तुलना करने और अलग करने की क्रियाएँ भी आती हैं।
एक काल्पनिक कक्षा
शिक्षक बच्चों से नींबू का वर्णन पूछती है। स्वाद का अनुभव एक बात है; उस स्वाद की याद, इच्छा या नापसंदगी पर ध्यान देना दूसरी। यह संपादकीय उदाहरण दोनों स्रोतों की भूमिका समझाता है। वह लॉक की पूरी ज्ञानमीमांसा का प्रयोगात्मक परीक्षण नहीं।
सीमा स्पष्ट है: जन्मजात विचारों का विरोध जन्मजात क्षमता या जैविक संरचना के हर रूप का निषेध नहीं है। आज के मनोविज्ञान और तंत्रिकाविज्ञान के प्रश्न अलग विधियों से जाँचे जाते हैं। Locke की ऐतिहासिक उपमा को आधुनिक बाल-विकास का अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष बनाना उचित नहीं।
क्या अनुभववाद कहता है कि केवल आँख से देखा सत्य है?
नहीं। लॉक इंद्रिय अनुभव के साथ मन की अपनी गतिविधियों पर चिंतन को भी सामग्री का स्रोत मानते हैं।
क्या खाली कागज का मतलब बच्चे में कोई क्षमता नहीं?
यह विचारों की सामग्री की उपमा है। क्षमता, संरचना और तैयार विचारों को एक जैसा नहीं मानना चाहिए।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
जॉन लॉक (John Locke) — अनुभव, अधिकार और शासन की सीमाएँ। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 46। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
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