कीर्केगार्द: आस्था का विरोधाभास आसान उत्तर क्यों नहीं?
किसी व्यक्ति को अपनी आस्था बिल्कुल निश्चित लगे, तो क्या उसका हर कार्य उचित हो जाता है? Fear and Trembling ऐसी आसानी रोकता है। कीर्केगार्द अब्राहम और इसहाक की बाइबिल कथा के माध्यम से आस्था और सामान्य नैतिक औचित्य के बीच एक कठिन तनाव सामने लाते हैं।

कहानी की बेचैनी
अब्राहम से पुत्र की बलि माँगे जाने की कथा पाठ का केंद्र है। प्रश्न यह नहीं कि कोई प्रेरणादायक लक्ष्य पाने के लिए साहस करे। पूछा जाता है कि धार्मिक कर्तव्य का दावा ऐसी कार्रवाई से कैसे जुड़ सकता है जिसे सामान्य नैतिक भाषा स्वीकार नहीं करती।
बोलने वाला कौन है?
कृति Johannes de silentio के छद्मनाम से लिखी गई है। इसलिए उसके प्रत्येक वाक्य को लेखक का सीधा आदेश मानना सावधानीहीन पढ़त होगी। पाठक को कथावाचक की स्थिति और वह क्या समझ सकता है, इस पर भी ध्यान देना पड़ता है।
व्यक्तिगत निर्णय की कठिनाई
एक काल्पनिक पाठक अपनी नई नौकरी चुनने को आस्था की छलाँग कहता है। यह लोकप्रिय उपमा जोखिम का कुछ अर्थ बता सकती है, लेकिन पुस्तक का धार्मिक-नैतिक विरोधाभास उसमें समा नहीं जाता। हर अनिश्चित निर्णय को अब्राहम की कथा जैसा बनाना उसकी गंभीरता घटाएगा।
सबसे जरूरी सीमा है: इस पुस्तक को निजी विश्वास के नाम पर दूसरों को नुकसान पहुँचाने का सामान्य लाइसेंस नहीं माना जा सकता। आस्था की कठिनता का वर्णन और किसी आधुनिक हिंसक दावे का औचित्य अलग बातें हैं। पाठ प्रश्न को तीखा करता है; आसान सार्वभौमिक नियम नहीं देता।
क्या आस्था केवल प्रमाण की कमी में अनुमान है?
इस कृति में उसका धार्मिक और अस्तित्वगत अर्थ अधिक गहरा है; साधारण अनुमान उसकी पूरी परिभाषा नहीं।
क्या कथावाचक और कीर्केगार्द एक ही आवाज हैं?
छद्मनाम उनकी लेखन-पद्धति का महत्वपूर्ण भाग है। दोनों को बिना भेद मिला देना व्याख्या को सीमित करता है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
सोरेन कीर्केगार्द (Soren Kierkegaard) — अस्तित्व, चुनाव और आस्था। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 38। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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