हाइडेगर: तकनीक में संसार संसाधन कैसे बनता है?
नदी को पानी का भंडार, जंगल को लकड़ी और मनुष्य को उपलब्ध श्रम कहना परिचित है। हाइडेगर पूछते हैं कि जब ऐसी भाषा ही देखने का प्रमुख तरीका बन जाए, तब संसार के कौन-से अर्थ पीछे छूटते हैं।

उपकरण से गहरा प्रश्न
तकनीक के विषय में प्रश्न में आधुनिक तकनीक केवल मशीनों का संग्रह नहीं है। वह वस्तुओं को व्यवस्थित, मापने योग्य और उपयोग के लिए तैयार भंडार के रूप में प्रकट करने का तरीका भी है।
इस ढाँचे को अक्सर enframing कहा जाता है। समस्या यह नहीं कि हर उपयोग बुरा है। खतरा तब है जब उपयोगिता की दृष्टि इतनी पूर्ण हो जाए कि दूसरी तरह का संबंध असंभव या अर्थहीन लगने लगे।
आँकड़ों में काम का अनुभव
काल्पनिक उदाहरण में कार्यालय कर्मचारी को केवल पूरे किए गए मामलों की संख्या से मापता है। जटिल मदद और सहकर्मी का साथ आँकड़े में नहीं आते। विश्लेषण पूछता है कि माप ने किस प्रकार के काम को दृश्य बनाया और किसे हटाया।
आलोचना की जरूरी दूरी
यह तकनीक छोड़ देने का आसान निर्देश नहीं है। हाइडेगर ठोस संस्थागत सुधार का विस्तृत कार्यक्रम भी नहीं देते। उनके नाज़ी समर्थन को ऐतिहासिक गंभीरता से पढ़ना चाहिए; दार्शनिक शब्दावली राजनीतिक जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करती।
क्या मशीन अपने आप समस्या है?
प्रश्न उस व्यापक दृष्टि का है जो हर अस्तित्व को उपलब्ध संसाधन में बदल देती है।
क्या मापना बंद कर देना चाहिए?
ऐसा सामान्य निष्कर्ष नहीं निकलता। माप की सीमा और छूटे अर्थों की जाँच करनी चाहिए।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
मार्टिन हाइडेगर (Martin Heidegger) — अस्तित्व, समय और तकनीक का प्रश्न। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 82। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
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