पाउलो फ्रेरे: संवाद वाली शिक्षा में क्या बदलता है?
शिक्षक बोलता रहे और विद्यार्थी सही उत्तर जमा करते रहें तो जानकारी बढ़ सकती है। पाउलो फ्रेरे पूछते हैं कि क्या वे अपनी दुनिया को प्रश्न करने वाले सहभागी भी बन रहे हैं। यही उनकी बैंकिंग शिक्षा की आलोचना का प्रवेश है।

विद्यार्थी खाली बर्तन नहीं
उत्पीड़ितों का शिक्षाशास्त्र में बैंकिंग रूपक ऐसी शिक्षा को दिखाता है जिसमें ज्ञान जमा किया जाता है। शिक्षक विषय होता है, विद्यार्थी ग्रहण करने वाली वस्तु। अनुभव और वास्तविक सामाजिक प्रश्न पाठ से कट जाते हैं।
समस्या प्रस्तुत करने वाली शिक्षा में शिक्षक और विद्यार्थी संसार को साथ समझने का काम करते हैं। इसका अर्थ शिक्षक के ज्ञान का अंत नहीं। ज्ञान का उपयोग प्रश्न खोलने और अनुभव की आलोचनात्मक जाँच में होता है।
पानी की काल्पनिक कक्षा
एक कक्षा स्थानीय जलसंकट पढ़ती है। केवल परिभाषा याद करने के स्थान पर विद्यार्थी उपलब्ध आँकड़े, श्रम का बँटवारा और अलग मोहल्लों की पहुँच देखते हैं। शिक्षक प्रमाण और तर्क की माँग करता है; संवाद केवल राय सुनना नहीं रहता।
संवाद की राजनीतिक जिम्मेदारी
फ्रेरे का उद्देश्य मुक्ति और दमन की पहचान से जुड़ा है। उनकी भाषा को किसी भी चर्चा-गतिविधि का सजावटी नाम बना देना यह लक्ष्य खो देता है। संवाद भी असमान शक्ति से प्रभावित हो सकता है; पाठ्यक्रम और शिक्षक को इसकी जिम्मेदारी लेनी पड़ती है।
क्या फ्रेरे पढ़ाना बंद करने को कहते हैं?
नहीं। वे एकतरफा जमा करने वाले संबंध को बदलने का आग्रह करते हैं।
क्या अनुभव अपने आप सही ज्ञान है?
नहीं। अनुभव संवाद, प्रमाण और चिंतन का आरंभ बनता है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
पाउलो फ्रेरे (Paulo Freire) — संवाद, चेतना और मुक्ति की शिक्षा। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 87। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
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