डोना हारावे: स्थित ज्ञान वस्तुनिष्ठ कैसे हो सकता है?
किसी चीज को कहीं से देखना हमारी सीमा है। क्या उसी सीमा को स्वीकार करना बेहतर ज्ञान की शुरुआत हो सकता है? डोना हारावे का स्थित ज्ञान पूर्ण, स्थानहीन दृष्टि के दावे पर प्रश्न उठाता है और जिम्मेदार वस्तुनिष्ठता की संभावना खोजता है।

नजर की जगह बताना
सिचुएटेड नॉलेजेज़ में जानने वाले की देह, उपकरण और सामाजिक स्थिति अदृश्य नहीं मानी जाती। दृष्टि अपने बनने की परिस्थितियों के लिए जवाबदेह होनी चाहिए। सीमित होना अपने आप गलत होना नहीं; अपनी सीमा छिपाकर सर्वज्ञ होने का दावा करना समस्या है।
यह सभी राय समान कहने का आसान सापेक्षवाद नहीं। अलग स्थितियों के बीच संबंध, अनुवाद और आलोचना महत्वपूर्ण रहते हैं। दृष्टिकोण बताना प्रमाण की जगह नहीं लेता, बल्कि प्रमाण कैसे बना और क्या छूट गया, यह पूछने में मदद करता है।
नक्शे का काल्पनिक निरीक्षण
एक नगर का नक्शा कार-यात्रा बहुत अच्छी दिखाता है, लेकिन पैदल चलने वालों की बाधाएँ गायब हैं। शोधकर्ता अपनी विधि और उपयोगकर्ता की स्थिति स्पष्ट करके दूसरी जानकारी जोड़ता है। यह आधुनिक उदाहरण स्थित ज्ञान की समस्या समझाता है, हारावे के पाठ का अपना अध्ययन नहीं।
सीमा यह है कि सामाजिक स्थान से किसी व्यक्ति को स्वतः अचूक अधिकार नहीं मिलता। वंचित स्थिति भी आंतरिक भिन्नता और त्रुटि से मुक्त नहीं। जवाबदेही लगातार काम है: दावे को कारण, अनुभव और दूसरों की आलोचना के लिए खुला रखना पड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या स्थित ज्ञान विज्ञान को नकारता है?
इस परिचय में प्रश्न ज्ञान के निर्माण और जिम्मेदारी का है, सभी वैज्ञानिक दावों को अस्वीकार करने का नहीं।
क्या अपनी पहचान बता देना पर्याप्त है?
नहीं। विधि, सीमाएँ और सुधार के लिए खुलापन भी दिखाना होगा।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
डोना हारावे (Donna Haraway) — स्थित ज्ञान, साइबोर्ग और बहु-प्रजातीय संसार। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 184। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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