देल्यूज़: दोहराव में भिन्नता कैसे बनती है?
एक संगीत-पंक्ति दूसरी बार सुनने पर वैसी ही क्यों नहीं लगती? ध्वनियाँ मिल सकती हैं, लेकिन प्रतीक्षा और संदर्भ बदल चुके हैं। जिल देल्यूज़ दोहराव को केवल एक जैसे नमूनों की गिनती तक सीमित नहीं रखते।

पहचान से बाहर भिन्नता
डिफरेंस एंड रिपिटिशन में चुनौती यह है कि भिन्नता को पहले से तय पहचान के मुकाबले छोटी कमी न समझा जाए। नई चीज का अर्थ किसी तैयार श्रेणी में उसका स्थान भर नहीं है। भिन्नता उत्पादक प्रश्न बनती है।
दोहराव और सामान्य समानता अलग किए जाते हैं। एक वस्तु दूसरी के बदले रख देना हमेशा उस विशेष घटना को दोहराना नहीं है। समय, संबंध और अनुभव बदलने से जो लौटता है उसमें नया तनाव या अर्थ बन सकता है।
अभ्यास का काल्पनिक दृश्य
एक काल्पनिक नर्तकी रोज वही क्रम करती है। शरीर की गति, ध्यान और दूसरे नर्तक के साथ संबंध बदलते हैं। यह उदाहरण अवधारणा का प्रवेश है; उससे पुस्तक के जटिल तात्त्विक तर्क अपने आप सिद्ध नहीं हो जाते।
हर नवीनता अच्छी नहीं
भिन्नता की दार्शनिक भूमिका से यह नैतिक आदेश नहीं निकलता कि नया हमेशा अच्छा और स्थिर हमेशा बुरा है। देल्यूज़ की परियोजना विचार, समय और सत्ता की जटिल चर्चा करती है; उसे रचनात्मकता बढ़ाने की सरल सलाह बनाना अपर्याप्त होगा।
क्या दोहराव बिल्कुल समान प्रतियाँ बनाता है?
देल्यूज़ का प्रश्न है कि लौटने की प्रक्रिया में विशिष्ट अंतर कैसे काम करता है।
क्या यह केवल कला की धारणा है?
नहीं। पुस्तक का दायरा तत्त्वमीमांसा और विचार की संरचना तक जाता है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
जिल देल्यूज़ (Gilles Deleuze) — भिन्नता, बहुलता और सृजन। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 94। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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