चॉम्स्की: भाषा जानना और बोल पाना कैसे अलग हैं?
हम कभी वाक्य भूलते, बीच में रुकते या गलती करते हैं। क्या हर गलती का मतलब भाषा का नियम न जानना है? नोम चॉम्स्की का क्षमता और निष्पादन का भेद इस प्रश्न को भाषाविज्ञान के केंद्र में रखता है।

ज्ञान और वास्तविक प्रयोग
आस्पेक्ट्स ऑफ द थ्योरी ऑफ सिंटैक्स में क्षमता भाषा के निहित ज्ञान से जुड़ती है। निष्पादन वास्तविक परिस्थितियों में भाषा का प्रयोग है। स्मृति, ध्यान और अन्य परिस्थितियाँ उसे प्रभावित करती हैं। वास्तविक वाक्यों की सूची पूरी व्याकरणिक क्षमता नहीं होती।
बोलने वाला ऐसे वाक्य भी समझ सकता है जिन्हें उसने पहले नहीं सुना। जनरेटिव व्याकरण इस रचनात्मकता के नियमगत आधार को समझना चाहता है। यह दावा केवल शब्द याद करने से आगे भाषा की संरचना का प्रश्न खोलता है।
हिचक का काल्पनिक दृश्य
काल्पनिक विद्यार्थी परिचित भाषा में उत्तर जानते हुए भी सभा में वाक्य अधूरा छोड़ देता है। उसके उस प्रदर्शन से सारी भाषिक क्षमता मापना जल्दबाजी होगी। फिर भी परिस्थिति का व्यवस्थित अध्ययन आवश्यक है; अंतर का नाम लेना पर्याप्त परीक्षण नहीं।
आदर्शीकरण की सीमा
यह भेद एक विश्लेषणात्मक आदर्शीकरण है। सामाजिक उपयोग, विविधता और संवाद का महत्व इससे समाप्त नहीं होता। चॉम्स्की की भाषावैज्ञानिक तथा राजनीतिक रचनाओं के निष्कर्ष भी अलग तर्कों पर आधारित हैं; एक क्षेत्र की प्रतिष्ठा दूसरे का स्वतः प्रमाण नहीं।
क्या गलती हमेशा नियम न जानने का संकेत है?
नहीं। ध्यान, स्मृति और वास्तविक प्रयोग की परिस्थिति भी भूमिका निभा सकती है।
क्या क्षमता का अर्थ कई भाषाएँ बोलना है?
यहाँ अवधारणा किसी भाषा की निहित संरचनात्मक जानकारी से जुड़ी है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
नोम चॉम्स्की (Noam Chomsky) — भाषा, मन और सत्ता की आलोचना। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 112। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
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