बेंथम: कानून की उपयोगिता को कैसे परखें?
किसी नियम को पुराना या सम्मानित कहना उसे अच्छा सिद्ध नहीं करता। जेरेमी बेंथम पूछते हैं कि उससे किसका सुख बढ़ता है और किसकी पीड़ा। कानून की आलोचना के लिए परिणामों को सामने लाना उनकी उपयोगिता-दृष्टि का केंद्रीय कदम है।

सुख-पीड़ा का सार्वजनिक हिसाब
एन इंट्रोडक्शन टू द प्रिंसिपल्स ऑफ मॉरल्स एंड लेजिस्लेशन में तीव्रता, अवधि, निश्चितता और प्रभावित व्यक्तियों की संख्या जैसे पहलू आते हैं। उद्देश्य सुख को केवल ऊँची भावना कहने के बजाय निर्णय के कारण स्पष्ट करना है।
दंड स्वयं पीड़ा पैदा करता है। उपयोगिता की कसौटी पर उसे तभी उचित ठहराया जा सकता है जब वह अधिक गंभीर बुराई रोकने में समर्थ हो। परंपरा, प्रतिशोध या सार्वजनिक क्रोध अपने आप पर्याप्त कारण नहीं बनते।
दंड का काल्पनिक मामला
मान लें किसी पुस्तकालय में देर से किताब लौटाने पर सबके लिए भारी जुर्माना है। क्या इससे वापसी सचमुच सुधरती है? क्या गरीब पाठक पुस्तकालय छोड़ देते हैं? विकल्पों और अलग समूहों पर परिणाम देखने से नियम की वास्तविक कीमत स्पष्ट होगी।
बहुमत की खुशी की सीमा
सुख जोड़ने का विचार कठिन प्रश्न छोड़ता है: अलग व्यक्तियों के अनुभव कैसे तुलना योग्य हों? क्या थोड़े लोगों पर भारी बोझ डालकर कुल लाभ बढ़ाना न्यायपूर्ण होगा? बेंथम को पढ़ते समय अधिकार और कमजोर समूहों की सुरक्षा पर यह आपत्ति सामने रखनी चाहिए।
क्या उपयोगिता केवल पैसे का लाभ है?
नहीं। सुख और पीड़ा धन से व्यापक अनुभव हैं।
क्या उनका हिसाब हमेशा सटीक अंक देता है?
वह निर्णय के पहलू दिखाता है; जीवन के सभी अनुभव विश्वसनीय संख्याएँ नहीं बन जाते।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
जेरेमी बेंथम (Jeremy Bentham) — उपयोगिता, कानून और सुधार की गणना। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 76। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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