फ़्रांसिस बेकन: ज्ञान में पूर्वाग्रह कैसे घुसते हैं?
किसी बात को बार-बार देखना उसके सही होने का पूरा प्रमाण क्यों नहीं? फ़्रांसिस बेकन के लिए मन निष्पक्ष दर्पण नहीं है। वह अनुभव को अपनी उम्मीद, भाषा और सीखी हुई धारणाओं के अनुसार मोड़ सकता है।

चार मूर्तियाँ, चार बाधाएँ
नोवम ऑर्गेनम में जाति की मूर्तियाँ मानव सोच की साझा प्रवृत्तियाँ हैं। गुफा की मूर्तियाँ निजी आदतों और शिक्षा से जुड़ती हैं। बाजार की मूर्तियाँ शब्दों के भ्रम में, रंगमंच की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित दर्शन को तैयार नाटक मानकर स्वीकारने में दिखाई देती हैं।
ये धार्मिक प्रतिमाओं की सूची नहीं, जाँच की बाधाओं के नाम हैं। किसी मत के समर्थक उदाहरण इकट्ठा कर लेना पर्याप्त नहीं। विरोधी मामलों को देखना और घटनाओं की तुलना करना धारणा की परीक्षा को मजबूत करता है।
सहमति के बाहर प्रमाण
काल्पनिक उदाहरण में शिक्षक मानता है कि देर से आने वाले विद्यार्थी आलसी हैं। वह केवल देर से आए छात्रों की कमजोर प्रतियाँ देखता है। यात्रा, काम, समय-सारणी और समय पर आए कमजोर छात्रों की जानकारी छोड़ने से निष्कर्ष पहले से तय रहता है।
विधि की ऐतिहासिक सीमा
बेकन का व्यवस्थित अनुभव पर जोर महत्वपूर्ण है, पर आधुनिक विज्ञान उनकी विधि भर नहीं है। गणितीय मॉडल, परिकल्पना और अनेक प्रयोग-पद्धतियाँ भी जरूरी हैं। उनके कार्यक्रम को हर विषय पर लागू होने वाली त्रुटिहीन मशीन मानना नया पूर्वाग्रह होगा।
क्या बेकन अनुभव को हमेशा सही मानते हैं?
वे अनुभव को व्यवस्थित और आलोचनात्मक ढंग से जुटाने पर जोर देते हैं।
पहला उपयोगी सवाल क्या है?
कौन-सा विपरीत मामला मेरी पसंदीदा व्याख्या को बदल सकता है?
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
फ़्रांसिस बेकन (Francis Bacon) — अनुभव, विधि और ज्ञान की शक्ति। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 73। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
स्रोत और आगे की पढ़ाई










टिप्पणियां