अरस्तू का मध्यम: साहस बीच का औसत क्यों नहीं?
क्या साहसी होने के लिए डर और लापरवाही को बराबर मात्रा में मिलाना चाहिए? अरस्तू का उत्तर गणितीय नहीं है। सद्गुण का मध्यम परिस्थिति, उद्देश्य और उचित निर्णय से संबंधित है; दो अंकों का बीच निकालना पर्याप्त नहीं।

आदत कैसे चरित्र बनती है?
निकोमाखीय नीतिशास्त्र की दूसरी पुस्तक में नैतिक सद्गुण अभ्यास से विकसित होता है। हम न्यायपूर्ण कार्य करके न्यायशील बनते हैं। लेकिन बाहरी काम का दोहराव ही सब कुछ नहीं: व्यक्ति किस समझ और चयन से काम करता है, उसका स्थायी स्वभाव भी मायने रखता है।
हमारे सापेक्ष मध्यम
भय और विश्वास के मामले में कायरता तथा उतावलापन दोनों चूक सकते हैं। साहस वास्तविक जोखिम को पहचानकर उचित उद्देश्य के लिए टिकना है। अलग व्यक्ति और परिस्थिति में वही बाहरी व्यवहार सही नहीं होगा। इसलिए मध्यम को हर संघर्ष में समझौता कह देना भी गलत है।
छोटा काल्पनिक निर्णय
काल्पनिक कर्मचारी सीमा मशीन में खराबी देखती है। बिना सुरक्षा के उसे चलाते रहना उतावलापन होगा; हर मामूली आवाज पर हमेशा भाग जाना दूसरी चूक हो सकती है। काम रोककर प्रशिक्षित सहायता बुलाना विवेकपूर्ण विकल्प हो सकता है। यह उदाहरण अरस्तू की चर्चा समझाता है, औद्योगिक सुरक्षा का निर्देश नहीं।
एक सीमा ध्यान में रहे: अरस्तू के अनुसार कुछ क्रियाएँ अपने प्रकार से गलत हैं; उनके लिए सही मात्रा खोजकर उन्हें सद्गुण नहीं बनाया जा सकता। उनके प्राचीन सामाजिक ढाँचे में नागरिकता और श्रम संबंधी असमानताएँ भी थीं, जिन्हें आज स्वीकार करना आवश्यक नहीं।
क्या सद्गुण जन्म से मिलता है?
उनके यहाँ क्षमता और अभ्यास का संबंध है; नैतिक चरित्र शिक्षा, क्रिया और आदत से बनता है।
क्या मध्यम हमेशा नरम फैसला होगा?
नहीं। परिस्थिति में दृढ़ विरोध उचित हो सकता है। कसौटी कम तीव्र होना नहीं, उचित कारण और ढंग है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
अरस्तू (Aristotle) — तर्क, सद्गुण और अच्छे जीवन की खोज। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 18। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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