एडम स्मिथ: निष्पक्ष दर्शक हमें क्या देखने देता है?
अपना क्रोध उचित लगता है, पर दूसरे का वैसा ही क्रोध बढ़ा हुआ क्यों दिखाई देता है? एडम स्मिथ का निष्पक्ष दर्शक नैतिक निर्णय की इसी दूरी को समझने का साधन है। उनका नैतिक दर्शन स्वार्थ की एक पंक्ति में नहीं समाता।

सहानुभूति से निर्णय तक
द थ्योरी ऑफ मॉरल सेंटिमेंट्स में सहानुभूति कल्पना के माध्यम से दूसरे की स्थिति में प्रवेश करने से जुड़ी है। हमें उसकी भावना हूबहू नहीं मिलती। हम परिस्थिति और उस पर प्रतिक्रिया के बीच उपयुक्तता का अनुमान लगाते हैं।
निष्पक्ष दर्शक वह कल्पित दृष्टि है जो निजी लाभ से कुछ दूरी लेकर आचरण देखती है। यह भीड़ की स्वीकृति का दूसरा नाम नहीं। लोकप्रिय प्रशंसा गलत हो सकती है; व्यक्ति अपने व्यवहार को अधिक न्यायपूर्ण दृष्टि के सामने रख सकता है।
विवाद का एक दृश्य
काल्पनिक उदाहरण में दुकान का मालिक ग्राहक की शिकायत को अपमान मानता है। वह अपनी थकान जानता है, ग्राहक की परेशानी नहीं। दोनों परिस्थितियों को देखने वाला दर्शक दोष और प्रतिक्रिया के अनुपात को अलग तरह से समझ सकता है।
कल्पना की सामाजिक सीमा
दूसरे की स्थिति की कल्पना हमेशा पूरी या निष्पक्ष नहीं होती। वर्ग, दूरी और शक्ति यह प्रभावित करते हैं कि कौन हमें समझने योग्य लगता है। इसलिए इस अभ्यास के साथ वास्तविक लोगों की बात सुनना और न्याय के संस्थागत नियम रखना भी जरूरी है।
क्या निष्पक्ष दर्शक कोई वास्तविक व्यक्ति है?
वह नैतिक आत्म-मूल्यांकन का कल्पित दृष्टिकोण है, सर्वज्ञ न्यायाधीश नहीं।
क्या स्मिथ केवल स्वार्थ का समर्थन करते हैं?
उनकी नैतिक पुस्तक सहानुभूति, न्याय और आत्मसंयम की विस्तृत चर्चा करती है।
हिंदी में पुस्तक पढ़ें या सुनें
एडम स्मिथ (Adam Smith) — सहानुभूति, न्याय और वाणिज्यिक समाज। Deivede Eder Ferreira का स्वतंत्र हिंदी परिचय, ABRAFP International Press। 60 मिनट में महान विचारक श्रृंखला, खंड 75। यह विचारक की अपनी रचना या अधिकृत अनुवाद नहीं है।
ई-बुक और ऑडियोबुक अलग संस्करण हैं। वर्तमान कीमत, नमूना और आपके देश की उपलब्धता Google Play पर देखें।
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